जयपुर, एजेंसी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रिहा किए गए डॉ. कफील खान ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि वह चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाओं को बहाल करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे. उल्लेखनीय है कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के निलंबित चिकित्सक खान को अदालत ने मंगलवार को रिहा करने का आदेश दिया था.

खान ने कहा, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मेरे खिलाफ लगाए गए आरोपों को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है तो ऐसे में मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखूंगा कि चिकित्सक के रूप में मेरी सेवाएं बहाल की जाएं. अगर मुझे इसकी अनुमति नहीं मिलती है तो मैं कार्यकर्ता के रूप में असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर लगाऊंगा.’ उल्लेखनीय है कि 2017 में एक सरकारी अस्पताल में कथित तौर पर आक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण कुछ बच्चों की मौत के बाद डॉ कफील को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से निलंबित कर दिया गया था.

खान ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ जयपुर आए हैं क्योंकि उनका व उनके परिवार का मानना है कि वे यहां अधिक सुरक्षित हैं. खान ने कहा, ‘राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है. मेरे परिवार का मानना है कि हम यहां सुरक्षित रहेंगे. मैं अपने परिवार के साथ कुछ अच्छा समय बिताना चाहता हूं.’ डॉ. खान ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार ने उन्हें गलत तरीके से फंसाकर जेल भेजा क्योंकि वह व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत हुई तो मैंने व्यवस्था में कमियों का खुलासा करने की कोशिश की. हमारे मुख्यमंत्री को यह अच्छा नहीं लगा और मेरे खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज कर मुझे जेल में डाल दिया गया.’ खान ने गिरफ्तारी के दौरान उत्पीड़न का भी जिक्र संवाददाताओं के समक्ष किया.

उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत खान की गिरफ्तारी को मंगलवार को अवैध बताया और उनकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए. अदालत के आदेश के बाद खान को मंगलवार देर रात मधुरा की जेल से रिहा किया गया. कफील संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ पिछले साल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जनवरी से जेल में बंद थे. डॉ कफील ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की विशेष पुलिस (एसटीएफ) ने गिरफ्तार करने के बाद न केवल उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया बल्कि ‘अजीबो गरीब’ सवाल भी पूछे.

खान ने कहा कि उन्हें नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से कोई दिक्कत नहीं है जो नागरिकता देता है लेकिन उसके बाद होने वाले उस क्रमानुसार (क्रोनोलाजी) से परेशानी है जिसमें राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से जुड़े काम शामिल हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि नागरिकों से उनके धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव हो.’ डा कफील ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी से उनके परिवार को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी. उनकी 65 साल की बुजुर्ग मां को अदालतों के चक्कर लगाने पड़े, भाइयों का कारोबार तबाह हो गया. यहां तक कि इतने समय जेल में रहने के बाद जब वह घर आए तो उनके साढ़े सात माह के छोटे बेटे ने उन्हें पहचाना तक नहीं. कफील ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई भी सरकार उन्हें इससे बड़ा दर्द दे सकती है. इसके साथ ही डा कफील ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा तथा समाजवादी नेता अखिलेश यादव सहित उन भी विपक्षी नेताओं का आभार किया जो उनके समर्थन में आए.

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