नई दिल्ली:  क्या आप जानते हैं कि कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर में जो एंटीबॉडी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनती है वह कितने दिनों तक रहती है? क्या वह कुछ वक़्त के लिए होती है? या लंबे समय तक रहती है? एंटीबॉडी कब बनती है? और कितने दिनों तक कारगर रहती है?  ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका अभी जवाब नहीं मिल पाया है.

इस पर दुनिया भर में रिसर्च चल रही है और इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश हो रही है. एंटीबॉडी के बारे में जानकारी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे ही पता चलेगा की आखिर कोरोना संक्रमित होने के बाद दोबारा वह व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है.

इस बारे में दुनिया भर में रिसर्च हो रही है. ये पता किया जा रहा है की एंटीबॉडी आखिर कितने दिनों तक शरीर में मौजूद रहती है और काम करती है. इस पर भारत सरकार की भी नजर है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक दुनिया में इस बारे में हो रही रिसर्च पर वह भी नजर रखे हुए है और भारत में भी इस बारे में पता किया जा रहा है.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि अलग-अलग तरह की साइंटिफिक स्टडीज स्वास्थ्य मंत्रालय के संज्ञान में हैं जिनमें यह कहा गया है पांच-छ: महीने से लेकर सालों तक इम्यूनिटी या एंटीबॉडी रहते हैं. लेकिन हमारा सब को परामर्श है कि चाहे आप बीमार हुए हों और ठीक भी हो गए हो तो भी सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना, हाथ धोना इन सब चीजों को का पालन करें.

वहीं आईसीएमआर यानी इंडियन मेडिकल काउंसिल भी इस बारे जानकारी जुटा रही है. आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉ बलराम भार्गव के मुताबिक इस बीमारी और इसके एंटीबॉडी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है क्योंकि ये सिर्फ 8 महीने पुरानी है. ऐसे रिसर्च से ही फिलहाल कुछ पता लग पाएगा.

डॉ बलराम भार्गव ने कहा, “महत्वपूर्ण बात यह है कि यह 7-8 महीने पुरानी बीमारी है इसीलिए हमें यह जानकारी नहीं है कि इसकी इम्युनिटी कितने दिनों तक रहेगी. इसके बारे में स्टडी की जा रही है. भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में इस बारे में स्टडी की जा रही है और यह देखा जा रहा है कि आखिर एंटीबॉडी कितनी वक्त तक शरीर में रहते हैं.”

आईसीएमआर में डीजी बलराम भार्गव के मुताबिक कोरोना वायरस एक रेस्पिरेटरी वायरस जैसे इन्फ्लूएंजा या फ्लू की तरह है. इन बीमारियों में भी इम्यूनिटी या शरीर में एंटीबॉडी ज्यादा वक़्त तक नहीं रहती. एंटीबॉडी लंबे समय तक ना होने की वजह से बार-बार संक्रमण का खतरा रहता है. लेकिन इस बारे अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है की ये वायरस भी इन वायरस की तरह बिहेव करता है क्या.

डॉ बलराम भार्गव ने कहा, “एक बात याद रखने की है कि रेस्पिरेटरी वायरस फिर चाहे वह इनफ्लुएजा हो या फ्लू.  उनकी हिस्ट्री देखें तो फ्लू वैक्सीन हर साल दिया जाता है. इनफ्लुएजा की वैक्सीन हर साल दी जाती है क्योंकि उसकी इम्यूनिटी लास्ट तक नहीं करती या साल भर तक नहीं रहती. इस वायरस के बारे में अभी हम और जानकारी जुटा रहे हैं बहुत सारी स्टडी इस बारे में आ रही है.”

एंटीबॉडी के बारे में जानकारी बहुत जरूरी है. हाल में एक ऐसा केस हांगकांग और दो भारत में आए हैं जहां व्यक्ति कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी दोबारा संक्रमित हो गया है. इन मामलों में ये कयास लगाए जा रहे हैं की शरीर में एंटीबॉडी ख़त्म होने की वजह से ऐसा हुआ है. संक्रमण से ठीक होने के बाद एंटीबॉडी ज्यादा वक़्त तक नहीं रही और संक्रमण हुआ. कई जानकारों का ऐसा मानना है.

डॉ एम सी मिश्रा, पूर्व निदेशक, AIIMS ने कहा, “कोरोना संक्रमण दोबारा हो सकता है यह संभव है. अभी हांगकांग से ऐसे ही एक मरीज की खबर आई है. मगर पहले भी देखा गया है मार्च के महीने में कई अलग-अलग जगहों पर ऐसे खबर आई हैं. कई मरीजों में ठीक होने के बाद दोबारा कोरोना लक्षण देखे गए लेकिन वायरस का जब स्ट्रक्चर देखा गया और उसकी जिनोमिक्स देखे गए तो वह डेड पाया गया. लेकिन मैं यह कहूंगा आप देखें की कॉमन फ्लू होता है, कोई भी एक तरह का रेस्पिरेट्री वायरस फ्लू होता है और लॉन्ग टर्म इम्यूनिटी अगर नहीं देता है तो यह दोबारा हो सकता है. कभी जल्दी तो कभी देर में हो सकता है कोई ऐसी नई बात नहीं है.”

डॉ एस पी ब्योत्रा, इंटरनल मेडिसिन, सर गंगाराम अस्पताल ने कहा, “यह बीमारी 6 महीने पुरानी है, आने वाले समय में दोबारा हो सकता है या नहीं? कैसे यह वायरस व्यवहार करेगा यह अभी कहना मुश्किल है. पूरी दुनिया में ऐसे कई केस सामने आए हैं. हमारे भारत में भी कुछ ऐसे केस सामने आए हैं. अब यह क्यों हो रहा है यह अभी एक्जेक्टली नहीं पता. जो शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं उसकी लाइफ कितनी है यह पता नहीं है. एंटीबॉडी कम हैं, यह खत्म हो जाए इंफेक्शन दोबारा हो सकता है. जैसे बहुत सारे वायरस ऐसे होते हैं जिंदगी में एक बार होते हैं लेकिन उसके बाद जिंदगी भर इम्यूनिटी हो जाती है. तो अभी निर्भर करता है कि एंटीबॉडी खत्म हो जाए तो फिर रीइंफेक्शन हो सकता है. या ये हो सकता है वायरस मुटेशन कर ले और री इंफेक्शन कर दे.”

यानी साफ है की वायरस से संक्रमित होने के बाद एंटीबॉडी कितने समय रहती है और वायरस का बिहेवियर कैसा है ये बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि इसी आधार पर इस बीमारी की वैक्सीन और दवा तैयार होगी. इसलिए भारत समेत कई देश इस बारे में रिसर्च में जुटे हुए हैं.

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