श्रीनगर: शिक्षक दिवस के मौके पर आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 47 शिक्षकों को उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है. इनमें कश्मीर घाटी की 49 साल की शिक्षिका रूही सुल्ताना भी शामिल थीं. रूही को Creative and Innovative Approach Towards Teaching  के लिए पुरस्कार से नवाजा गया.

रूही सुल्ताना ने बच्चों को पढ़ाने के लिए कूड़े करकट और ऐसे सामान का प्रयोग किया जो आम तौर पर लोग घरों से फेंक देते हैं. सरकारी स्कूल में शिक्षक होने के चलते उनके सामने हमेशा ज़रूरी सामान की कमी रहती थी, जिसकी वजह से वह बच्चों को अच्छे से नहीं पढ़ा पाती थी. इसलिए सुल्ताना ऐसे  सामान की मदद ली जिसे लोग कूड़ा कहते हैं.

रूही सुल्ताना घरों और दुकानों से खाली बोतल, डब्बे, प्लास्टिक और अन्य सामान इकट्ठा करती हैं. इस सामान की मदद से वह टीचिंग एड बना लेती हैं. इससे ना सिर्फ बच्चों को पढ़ना आसान हो जाता है, बल्कि बच्चे भी खेलो और पढ़ों (PLAY & LEARN) के तरीके से जल्दी सीख जाते हैं. आज घाटी के कई स्कूलों में रूही के तरीके से ही शिक्षक बच्चों को सिखा और पढ़ा रहे हैं.

रूही सुल्ताना राष्ट्रपति के हाथों से पुरस्कार लेना चाहती थीं, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस साल का वितरण ऑनलाइन तरीके से हुआ और श्रीनगर में ही उनको सम्मानित किया गया.

रूही सुल्ताना की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. 2008 में शिक्षा विभाग से जुड़ने के बाद भी उनकी अपनी शिक्षा नहीं रुकी. रूही सुल्ताना के पास आज कश्मीरी और उर्दू में मास्टर्स की डिग्री है, तो calligraphy और हिंदी में भी वह डिग्री ले चुकी हैं. इसी के साथ मध्य प्रदेश की भोज यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा इन इंक्लूसिव एजुकेशन भी किया है.

रूही की प्रतिभा को देखते हुए ही जम्मू-कश्मीर बोर्ड फॉर स्कूल एजुकेशन ने उनको जम्मू-कश्मीर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाने वाली  उर्दू, हिंदी और कश्मीरी भाषा की किताबें लिखने और उनको प्रकाशित करने की जिम्मेदारी भी दी है.

रूही के लिए सब से संतुष्टि देने वाला काम कोरोना लॉकडाउन में आया जब उनको प्रदेश के शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन क्लास के लिए कंटेंट क्रिएटर के तौर पर अतरिक्त भार दिया. रूही की देख-रेख में रेडियो, टीवी और ऑनलाइन के जरिए बच्चों की पढ़ाई का कंटेंट तैयार हुआ.

इस काम में रूही के लिए जम्मू-कश्मीर में 4G पर लगा प्रतिबंध सबसे बड़ी बाधा बना और इस चुनौती को पार करने में रूही की टीम को सफलता भी मिली. रूही ने ऐसा कंटेंट तैयार किया जो प्रदेश के हर क्षेत्र में इस्तेमाल भी हुआ और 2G स्पीड पर भी काम कर गया.

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