नई दिल्ली: कोरोना काल के दौरान देश में किये सुधारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महामारी भी 1.3 अरब भारतीयों की आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को प्रभावित करने में नाकाम रही है. दरअसल प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अमेरिका-भारत 2020 शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएस-आईएसपीएफ) भारत और अमेरिका के बीच भागीदारी के लिए काम करता है. 31 अगस्त से शुरू हुए इस 5 दिवसीय सम्मेलन की थीम “अमेरिका-भारत के सामने मौजूद नई चुनौतियां” है.

पीएम बोले- वैश्विक महामारी हमारी दृढ़ता,स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था की परीक्षा ले रही है
सम्मेलन को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वैश्विक महामारी का हर किसी पर असर पड़ा है और यह हमारी दृढ़ता, हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, हमारी अर्थव्यवस्था की परीक्षा ले रही है. उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात एक नई सोच की मांग करते हैं. ऐसी सोच जहां विकास की रणनीति मानव केन्द्रित हो. जहां हर किसी के बीच सहयोग की भावना हो. उन्होंने कहा कि देश क्षमताओं के विस्तार, गरीबों की सुरक्षा और हमारे नागरिकों के भविष्य को बचाने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है.

पीएम मोदी ने कहा-  देश में प्रति मिलियन आबादी पर मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम बनी हुई है
प्रधानमंत्री ने कोविड के खिलाफ लड़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि सुविधाएं बढ़ाने और नागरिकों के बीच जागरूकता के प्रसार की बदौलत 1.3 अरब जनसंख्या और सीमित संसाधनों वाले देश में प्रति मिलियन आबादी पर मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम बनी हुई है. उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि भारत का कारोबारी समुदाय, विशेष रूप से छोटे उपक्रम ज्यादा सक्रिय रहे हैं. उन्होंने कहा, लगभग शून्य से शुरुआत करते हुए उन्होंने हमें दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा पीपीई किट विनिर्माता बना दिया है. उन्होंने कहा कि हाल के दौर में देश में दूरगामी सुधार हुए हैं, जिससे कारोबार करना आसान हुआ है और लालफीताशाही कम हुई है.

प्रधानमंत्री ने रेल, सड़क और वायु संपर्क-मार्ग को मजबूत बनाने का भी उल्लेख किया.

पीएम मोदी ने कहा- विशेष डिजिटल मॉडल तैयार कर रहा है भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के निर्माण के लिए एक विशेष डिजिटल मॉडल तैयार कर रहा है. हम करोड़ों लोगों को बैंकिंग, कर्ज, डिजिटल भुगतान और बीमा उपलब्ध कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ फिन-टेक (वित्तीय प्रौद्योगिकी) का उपयोग कर रहे हैं. इन सभी पहलों में विश्व स्तरीय तकनीक और वैश्विक स्तर की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है.

मोदी ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता का उल्लेख किया जो पूरी वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम को कम करती है. उन्होंने व्यापक श्रम सुधारों पर भी बात की जो नियोक्ताओं के लिए अनुपालन का बोझ कम करते हैं और किस प्रकार ये कामगारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हैं.

पीएम ने फेसलेस असेसमेंट का भी किा जिक्र
प्रधानमंत्री ने अनिवार्य ई-प्लेटफॉर्म आधारित ‘फेसलेस असेसमेंट’ का उल्लेख किया और कहा कि ये करदाताओं के चार्टर के साथ-साथ नागरिकों की मदद करने में भी एक लंबी दूरी तय करेगा. बॉन्ड बाजार में जारी नियामकीय सुधारों से निवेशकों के लिए पहुंच में सुधार सुनिश्चित होगा. उन्होंने कहा कि भारत में एफडीआई 2019 में 20 प्रतिशत बढ़ा है, वो भी तब जब वैश्विक एफडीआई में 1 प्रतिशत की गिरावट आई है और ये हमारी एफडीआई व्यवस्था की सफलता को दिखाता है.

मोदी ने कहा कि उपरोक्त सभी कदम एक उज्ज्वल और ज्यादा समृद्ध भविष्य को सुनिश्चित करेंगे. ये एक मजबूत वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी योगदान देंगे.

‘आत्मनिर्भर भारत’ लोकल को ग्लोबल से मिलाता है
एक आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 1.3 अरब भारतीयों द्वारा अपनाए गए इस मिशन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ स्थानीय (लोकल) को वैश्विक (ग्लोबल) के साथ मिलाता है और इससे एक ग्लोबल फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में भारत की ताकत सुनिश्चित होती है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे लिए आगे की राह अवसरों से भरी हुई है. खासतौर पर निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में. उन्होंने कोयला, खनन, रेलवे, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को खोले जाने का भी उल्लेख किया. उन्होंने कृषि में सुधारों के साथ-साथ मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरणों, फार्मा क्षेत्रों के लिए शुरू की गई उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाओं का भी जिक्र किया.

प्रधानमंत्री ने इस शिखर सम्मेलन को बताया कि भारत में चुनौतियों का सामना करने के लिए एक ऐसी सरकार मौजूद है जो नतीजे देने में विश्वास करती है, एक ऐसी सरकार जिसके लिए ईज़ ऑफ लिविंग (सुगम जीवनशैली) उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबारी सुगमता).

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